गायत्री चालीसा (Gayatri Chalisa) Hindi PDF Download 2024

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PDF Nameगायत्री चालीसा (Gayatri Chalisa)
No. of Pages6
PDF Size0.73 MB
LanguageHindi
Tagsचालीसा संग्रह
PDF CategoryHindu Books, Religion & Spirituality
Last Updated17 December,2023
Source / CreditsNetshopsy.c(om

Gayatri Chalisa Hindi PDF. गायत्री चालीसा (Gayatri Chalisa) Hindi

सभी वेदों की उत्पत्ति गायत्री माता से होती है इसीलिए हिंदू धर्म मेंगायत्री माता को वेद माता भी कहा जाता है 

गायत्री माता कोजननी भी कहा जाता है भारतीय संस्कृति की गायत्री उपासना जो लोग करते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है और उन्हें किसी भी वस्तु की कभी जरूरत या कभी कमी नहीं होती ग में ऐसा भी लिखा है आयु प्रणाम प्रजा पशु कीर्ति धन गायत्री माता से यह सबआशीर्वाद मिलते हैं|

गायत्री चालीसा (Gayatri Chalisa) Hindi PDF Download 2024
Source: Youtube

श्री गायत्री चालीसा इन हिन्दी PDF (Gayatri Chalisa) – हिन्दी अनुवाद सहित. गायत्री चालीसा (Gayatri Chalisa) Hindi

दोहा:

हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड।
शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड॥
जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री सुखधाम।
प्रणवों सावित्री, स्वधा, स्वाहा पूरन काम॥

चालीसा:

भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी।
गायत्री नित कलिमल दहनी॥

अक्षर चौबिस परम पुनीता।
इनमें बसें शास्त्र, श्रुति, गीता॥

शाश्वत सतोगुणी सतरुपा।
सत्य सनातन सुधा अनूपा॥

हंसारुढ़ सितम्बर धारी।
स्वर्णकांति शुचि गगन बिहारी॥

पुस्तक पुष्प कमंडलु माला।
शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला॥

ध्यान धरत पुलकित हिय होई।
सुख उपजत, दुःख दुरमति खोई॥

कामधेनु तुम सुर तरु छाया।
निराकार की अदभुत माया॥

तुम्हरी शरण गहै जो कोई।
तरै सकल संकट सों सोई॥

सरस्वती लक्ष्मी तुम काली।
दिपै तुम्हारी ज्योति निराली॥

तुम्हरी महिमा पारन पावें।
जो शारद शत मुख गुण गावें॥

चार वेद की मातु पुनीता।
तुम ब्रहमाणी गौरी सीता॥

महामंत्र जितने जग माहीं।
कोऊ गायत्री सम नाहीं॥

सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै।
आलस पाप अविघा नासै॥

सृष्टि बीज जग जननि भवानी।
काल रात्रि वरदा कल्यानी॥

ब्रहमा विष्णु रुद्र सुर जेते।
तुम सों पावें सुरता तेते॥

तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे।
जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे॥

महिमा अपरम्पार तुम्हारी।
जै जै जै त्रिपदा भय हारी॥

पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना।
तुम सम अधिक न जग में आना॥

तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा।
तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेषा॥

जानत तुमहिं, तुमहिं है जाई।
पारस परसि कुधातु सुहाई॥

तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई।
माता तुम सब ठौर समाई॥

ग्रह नक्षत्र ब्रहमाण्ड घनेरे।
सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे॥

सकलसृष्टि की प्राण विधाता।
पालक पोषक नाशक त्राता॥

मातेश्वरी दया व्रत धारी।
तुम सन तरे पतकी भारी॥

जापर कृपा तुम्हारी होई।
तापर कृपा करें सब कोई॥

मंद बुद्घि ते बुधि बल पावें।
रोगी रोग रहित है जावें॥

दारिद मिटै कटै सब पीरा।
नाशै दुःख हरै भव भीरा॥

गृह कलेश चित चिंता भारी।
नासै गायत्री भय हारी॥

संतिति हीन सुसंतति पावें।
सुख संपत्ति युत मोद मनावें॥

भूत पिशाच सबै भय खावें।
यम के दूत निकट नहिं आवें॥

जो सधवा सुमिरें चित लाई।
अछत सुहाग सदा सुखदाई॥

घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी।
विधवा रहें सत्य व्रत धारी॥

जयति जयति जगदम्ब भवानी।
तुम सम और दयालु न दानी॥

जो सदगुरु सों दीक्षा पावें।
सो साधन को सफल बनावें॥

सुमिरन करें सुरुचि बड़भागी।
लहैं मनोरथ गृही विरागी॥

अष्ट सिद्घि नवनिधि की दाता।
सब समर्थ गायत्री माता॥

ऋषि, मुनि, यती, तपस्वी, जोगी।
आरत, अर्थी, चिंतित, भोगी॥

जो जो शरण तुम्हारी आवें।
सो सो मन वांछित फल पावें॥

बल, बुद्घि, विघा, शील स्वभाऊ।
धन वैभव यश तेज उछाऊ॥

सकल बढ़ें उपजे सुख नाना।
जो यह पाठ करै धरि ध्याना॥

दोहा:

यह चालीसा भक्तियुत, पाठ करे जो कोय।
तापर कृपा प्रसन्नता, गायत्री की होय॥

गायत्री चालीसा (Gayatri Chalisa) Hindi विधि

गायत्री चालीसा करने से पहले स्नान कर लें और साफ और सरल कपड़े पहने

जहां पर मां गायत्री स्थापित है वहां बैठे और चालीसा का पाठ करनाशुरू करें

ध्यान रखें गायत्री चालीसा का पाठ अपने पूरी श्रद्धा से करेंऔर साफ मन से करें 

जिस दिन आप गायत्री चालीसा का पाठ करें उसे दिन गंगाजल युक्त पानी से स्नान करेंऔर गायत्री मंत्र का काम से कम पांच बार जरूर जब करें

माता गायत्री को साक्षी मानकर उनकी प्रतिमा वह तस्वीर की पूजा फल,फूल,डूब,दिया,अक्षत,चंदन,जल्दी से करें

संभव हो तो उपवास रखें |

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