Bajrang Baan PDF Download: (बजरंग बाण पाठ)

PDF NameBajrang Baan (बजरंग बाण पाठ)
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PDF Size1.09 MB
LanguageSanskrit
PDF CategoryHindu Books, Religion & Spirituality
ContentBajrang Baan (बजरंग बाण पाठ) Sanskrit

Bajrang Baan PDF Download (बजरंग बाण पाठ)Sanskrit

जो लोग बजरंगबली श्री हनुमान का जाप करते हैं उन लोगों से सभी प्रकार का दुख दर्द दूर रहता है और वह सभी प्रकार के भाई से भी बच्चे रहते हैंऔर अगर आप बजरंगबली को प्रसन्न करना चाहते हैं तो आपको हनुमान चालीसा का जाप करना चाहिए |

अगर आप बजरंगबली के बहुत बड़े भक्त हैं तो आप बजरंग बाण का भी जब साथ-साथ करेंइसका जवाब साथ करने से असीम कृपा की प्राप्ति होती है |

बजरंग बाण (Bajrang Baan) इसका पाठ जो जो भक्त करते हैं वह बजरंगबली की पूरी कृपा से भर जाते हैं और उनको सारे प्रकार की समस्याएं से मुक्ति मिल जाती हैबजरंग बाण का पाठ पूरी विधि और नियम से करना चाहिए और इसका पाठ विधि और नियम से करना आवश्यक महत्वपूर्ण होता है| [bajrang baan pdf download]

हमें इसका पाठ मंगलवार को आरंभ करना चाहिए |

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Source: Vijayrampatrika

बजरंग बाण पाठ

॥ दोहा ॥
निश्चय प्रेम प्रतीत ते, नििय करेंसिमाि ।
तेनि के कारज सकल शुभ, नसद्ध करैंििुमाि ॥
॥ चौपाई ॥
जय ििुमंत संत नितकारी ।
सुि लीजैप्रभुअरज िमारी ॥०१॥
जि के काज निलम्ब ि कीजै।
आतुर दौरर मिा सुख दीजै॥०२॥
जैसेकू नद नसन्धुिनि पारा ।
सुरसा बद पैनि निस्तारा ॥०३॥
आगेजाई लंनकिी रोका ।
मारेहु लात गई सुर लोका ॥०४॥
जाय निभीषण को सुख दीन्हा ।
सीता निरखख परम पद लीन्हा ॥०५॥
बाग उजारी नसंधुमिं बोरा ।
अनत आतुर यम कातर तोरा ॥०६॥
अक्षय कु मार मारर संिारा ।
लूम लपेट लंक को जारा ॥०७॥
लाि समाि लंक जरर गई ।
जय जय धुनि सुर पुर मिं भई ॥०८॥
अब निलम्ब के नि कारण स्वामी ।
कृ पा करहु उर अन्तयाामी ॥०९॥
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता ।
आतुर िोय दुख िरहु निपाता ॥१०॥
जैनगररधर जैजैसुखसागर ।
सुर समूि समरथ भटिागर ॥११॥
ॐ ििुििुििुििुििुमन्त ििीले।
बैररनिं मारू बज्र की कीले ॥१२॥
गदा बज्र लैबैररनिं मारो ।
मिाराज प्रभुदास उबारो ॥१३॥
ॐ कार हुंकार मिाप्रभुधािो ।
बज्र गदा ििुनिलम्ब ि लािो ॥१४॥
ॐ ह्ी ंह्ी ंह्ी ंििुमंत कपीसा ।
ॐ हुं हुं हुं ििुअरर उर शीशा ॥१५॥
सत्य िोहु िरर शपथ पाय के ।
रामदू त धरु मारु धाय के ॥१६॥
जय जय जय ििुमंत अगाधा ।
दु:ख पाित जि के नि अपराधा ॥१७॥
पूजा जप तप िेम अचारा।
िनिं जाित कछुदास तुम्हारा ॥१८॥
िि उपिि, मग नगरर गृि मािी ं।
तुम्हरेबल िम डरपत िािी ं ॥१९॥
पांय परोंकर जोरर मिािौं ।
यनि अिसर अब के नि गोिरािौं ॥२०॥
जय अंजनि कु मार बलिन्ता ।
शंकर सुिि िीर ििुमंता ॥२१॥
बदि कराल काल कु ल घालक ।
राम सिाय सदा प्रनत पालक ॥२२॥
भूत प्रेत नपशाच निशाचर ।
अनि बेताल काल मारी मर ॥२३॥
इन्हेंमारु तोनिं शपथ राम की ।
राखुिाथ मरजाद िाम की ॥२४॥
जिकसुता िरर दास किािौ ।
ताकी शपथ निलम्ब ि लािो ॥२५॥
जय जय जय धुनि िोत अकाशा ।
सुनमरत िोत दुसि दुुःख िाशा ॥२६॥
चरण शरण कर जोरर मिािौ ।
यनि अिसर अब के नि गौिरािौं ॥२७॥
उिुउिुचलुतोनिं राम दुिाई ।
पांय परौंकर जोरर मिाई ॥२८॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता ।
ॐ ििुििुििुििुििुमंता ॥२९॥
ॐ िं िं िांक देत कनप चंचल ।
ॐ सं सं सिनम परािेखल दल ॥३०॥
अपिेजि को तुरत उबारो ।
सुनमरत िोय आिन्द िमारो ॥३१॥
यि बजरंग बाण जेनि मारै।
तानि किो निर कौि उबारै ॥३२॥
पाि करैबजरंग बाण की ।
ििुमत रक्षा करैंप्राण की ॥३३॥
यि बजरंग बाण जो जापै।
तेनि तेभूत प्रेत सब कांपे ॥३४॥
धूप देय अरु जपैिमेशा ।
ताके ति िनिं रिैकलेशा ॥३५॥
॥ दोहा ॥
प्रेम प्रतीतनि कनप भजै, सदा धरैंउर ध्याि ।
तेनि के कारज सकल शुभ, नसद् घ करैंििुमाि ॥

बजरंग बाण (Hanuman Baan) पाठ की विधि Bajrang Baan (बजरंग बाण पाठ) Sanskrit

हमें इसका पाठ मंगलवार को आरंभ करना चाहिए 

अगर आप बजरंग बाण पाठ करना चाहते हैं तो उसे हमेशा मंगलवार से ही आरंभ करें 

मंगलवार के दिन सुबह जल्दी उठकर सरल कपड़े पहन कर स्नान करके मंदिर के सामने बैठ जाएं

जिस स्थान पर आप पूजा करना शुरू कर रहे हैं उसे स्थान को अच्छे से साफ कर ले और वहां पर हनुमान जी की मूर्ति को स्थापित करें

सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा से शुरू करें उसके बाद फिर गणेश पूजा के बाद से बजरंग बाण का पाठ आरंभ करें 

इसके बाद भगवान राम और माता सीता का ध्यान करें 

हनुमान जी की प्रतिमा के सामने धूप दिया जलाएं और उनका फूल से अर्पित करें 

ध्यान रखें आप कुछ से बने आसन पर बैठे 

जब आपका बजरंग बाण पूरा हो जाए तो श्री राम का स्मरण करें और फिर कीर्तन करें 

और हनुमान जी को प्रसाद के रूप में लड्डू चूरमा और मौसमी फल अर्पित करें |[Bajrang Baan PDF Download]

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Source: Hindu God Ganesh

Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics. Bajrang Baan (बजरंग बाण पाठ) Sanskrit

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अनजानी पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।

पैठी पताल तोरि जम कारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।

बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।

जो हनुमान जी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की

Bajrang Baan (बजरंग बाण पाठ) Sanskrit

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इन स्थितियों में बजरंग बाण का पाठ करने से बचे

एक बात का हमेशा ध्यान रखें कभी किसी को नीचा या छोटा दिखाने की भावना से इस पाठ का जब कभी ना करें

किसी भी विवाद को जीतने के लिए किसी भी अनुपस्थित कार्य को पूरा करने के लिए इसका जब या फिर इसका सहारा ना लें 

रोजाना की जिंदगी में आने वाली छोटी बड़ी बढ़ाओ या समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए इसका पाठ ना करें 

अगर आप सिर्फ किसी कठिन काम को पूरा करने की उद्देश्य इसका जाप कर रहे हैं तो इसका जब इस ऐसे ना करें 

धन संपत्ति या ऐसी चीजों को प्राप्त करने के लिए बजरंग बाण के पाठ ना करें

किसी से बदला लेने की भावना या किसी को हानि पहुंचाने केमतलब से इस पाठ काजब ना करें [bajrang baan pdf download]

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Introducing Saurabh Kumar, a distinguished university MBA postgraduate with more than five years of blogging experience. As a seasoned writer, SEO specialist, and digital storyteller, Saurabh skillfully combines his business knowledge with gripping storytelling. His blog entries provide strategic advice for improving online presence in addition to showcasing his in-depth knowledge on a wide range of subjects.

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